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2015-07-31T09:59:36+05:30

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गुरु की महिमा अपरंपार होती है । गुरु अर्थात शिक्षक ही एक विद्यार्थी को शिक्षित करता है। बिना गुरु के ज्ञान परप्त करना बहुत कठिन है। गुरु हमे सद्मार्ग दिखाता है ताकि हम अपने जीवन मे सफल हो। बिना गुरु के परिश्रम और प्रयत्नो का उचित फल नहीं मिलता । एक सफल विद्यार्थी के पीछे उसके गुरु की मेहनत भी होती है। गुरु ज्ञान का भंडार होता है । गुरु एक कुम्हार की भांति , अपने शिष्यों के भविष्य को सुंदर रूप देता है । प्राचीन काल मे भी, गुरु द्रोणाचार्य ने ही अर्जुन को धनुर्धारी औए एक महान योध्या बनाया । अगर हम अपने विद्यालय का उदाहरण ले तो , सभी शिक्षक , विद्यार्थियो को निस्पक्ष रूप से अच्छा ज्ञान देते है। गुरुओं का सभी को सम्मान करना चाहिए और उनकी दी गई सीख का हमेशा अनुशासन के साथ पालन करना चाहिए । शास्त्रो मे भी गुरु को ईश्वर के समान माना है ।
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