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2015-06-09T20:55:33+05:30
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अनेकता में एकता हिन्दु की विशेषता॥एक राग के हैं गीत मीत एक राह के।
एक बाग के हैं फूल फूल एक हार के।
देखती हैं यह जमीन आसमान देखता आसमान देखता॥१॥
एक देश के हैं अंग रंग भिन्न-भिन्न हैं।
एक जननी भारती के कोटि सुत अभिन्न है।
कोटि जीव बालकों में ब्रह्म एक खेलता ब्रह्म एक खेलता॥२॥
कर्म हैं बंटे हुए पर एक मूल मर्म है।
राष्ट्र भक्ति ही हमारा एक मात्र धर्म है।
कण्ठ -कण्ठ देश का एक स्वर बिखेरता एक स्वर बिखेरता॥३॥
एक लक्ष्य एक प्राण प्रण से हम जुटे हुए।
एक भारती की अर्चना में हम लगे हुए।
कोटि-कोटि साधनों का एक राष्ट्र देवता एक राष्ट्र देवता॥४॥


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