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2016-01-14T13:42:14+05:30

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णित को सामान्यतः लोग एक नीरस विषय मानते हैं क्योंकि गणित के आधारभूत नियमों और सूत्रों की जानकारी के अभाव में गणित को समझना कठिन है; साथ ही गणित को समझने में सूझ एवं तर्क शक्ति की परम आवश्यकता होती है। अतः मस्तिष्क पर दबाव डालना पड़ता है। जिनके पास सूझ, तर्क शक्ति एवं अच्छी स्मरण शक्ति है, उन लोगों के लिए गणित एक आनन्द का सागर है। समस्याओं से खेलना उनके लिए कष्ट-प्रद न होकर आनन्द-प्रद होता है। समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान मिलने पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा तथा अपार प्रसन्नता मिलती है। गणित अपने आपमें रहस्यों का संसार है। जिज्ञासु जब इस रहस्यमय संसार में प्रविष्ट करता है तो एक के बाद एक नये रहस्य सामने आने लगते हैं। रहस्यों के अनावृत्त होने पर यह रहस्यमय संसार परलोक में बदल जाता हैसंसार का लघुतम घटक बिन्दु है। बिन्दु की विमायें नहीं होतीं। बिन्दु की न लम्बाई होती है, न चौड़ाई और न मोटाई ही। यह वास्तव में असम्भव ही है। अतः हमें मानना पड़ेगा कि बिन्दु अति लघु विमाओं की कृति है। प्रकृति में बिन्दु के रूप में हमें अणु, जीवाणु, कोशिका आदि का साक्षात होता है। इनको सृष्टि की आदि इकाई के रूप में देखा जा सकता है। बिन्दु-बिन्दु से सिन्धु बनता है तथा बिन्दु के अन्दर सिन्धु समाया है। इस सम्बन्ध में श्याम विविर (Black hole) के अस्तित्व का पता चलने पर ईश्वर की अद्भुत शक्ति के बारे में कल्पना मात्र से ही आश्चर्यचकित रह जाना पड़ता है।
शर्तों के अधीन गति करते बिन्दु का मार्ग एक गणित से सम्बन्धित विषय है। इन्हें गणितीय वक्र या बिन्दुपथ कहते हैं। गणितीय वक्र अनेक प्रकार के हैं। सरल रेखा सरलतम गणितीय वक्र है। एक सरल रेखा-खण्ड दो बिन्दुओं के बीच न्यूनतम लम्बाई का पथ होता है। मनुष्य अपने हाथ से चाहकर भी एक सरल रेखा नहीं खींच सकता। इसके लिए उसे प्रकृति की शरण में ही जाना पड़ता है। एक धागे के दोनों सिरों पर बल लगाकर धागे को तान देने पर यह एक सरल रेखीय स्वरूप ग्रहण कर लेता है। एक धागे के सिरे पर भाल बाँधकर स्वतन्त्रतापूर्वक लटका देने पर यह ऊर्ध्वाधर सरल रेखा का स्वरूप ग्रहण करता है।

प्रकृति में सरल रेखाओं के अनेक रूपों में दर्शन होते हैं। स्वतन्त्रतापूर्वक पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के आधीन गिरता हुआ द्रव्य कण एक सरल रेखीय पथ निर्धारित करता है। कागज, कपड़े या पतली चादर को बीच से मोड़ने पर मोड़ का किनारा सरल रेखीय होता है। मकड़ी के जाले का तार सरल रेखीय आकृति ग्रहण करता है। प्रकाश की किरण सरल रेखा में गमन करती है।
सच तो यह है कि दुनिया में आदर्श सरल रेखाएं नहीं कही जा सकतीं क्योंकि किसी-न-किसी स्तर पर यहाँ भी त्रुटि शेष रहती है। प्रकाश की किरण भी एक आदर्श सरल रेखा न होकर एक तरंग के रूप में होती है। वास्तव में सरल रेखा एक कल्पना मात्र ही है।
प्रकृति में अनेक प्रकार की आकृतियों की वस्तुएँ देखने को मिलती हैं।
यथा-तालाब के पानी में कंकड़ फेंकने पर उठती तरंगें हमें वृत्ताकार दिखाई देती हैं।
सूरज, चन्द्रमा, इन्द्रधनुष हमें वृत्ताकार दृष्टिगोचर होते हैं।
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