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2016-03-20T15:04:27+05:30
 ऐसे छात्र जिनकी परीक्षा की तैयारी पूरी नहीं होती है ये छात्र आदतन नकलची नहीं होते लेकिन पढ़ाई के बोझ या अतिव्यस्तता की वजह से नकल करने के लिए मजबूर होते हैं। या फिर ऐसे छात्र जिनके लिए शिक्षा मायने नहीं रखती या फिर शिक्षा की अहमियत नहीं समझते उनमें नकल करने की प्रवृत्ति अधिक होती है। या फिरजिन छात्रों को क्लास में बहुत अधिक प्रतिद्वंद्विता का सामना करना पड़ता है जिसकी वजह से वे पढ़ने से घबराते हैं। या फिरऐसे छात्र जो शॉर्टकट अपना कर समाज को दिखने के लिए केवल डिग्री पाना चाहते हैं जिनके लिए व्यक्तिगत जीवन में ष्जीवन मूल्योंष् के कोई महत्ता नहीं होती तथा सामाजिक हित या अहित कोई मायने नहीं रखता।

माता-पिता को नकल के विषय पर अपने बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए।  इस मुद्दे से कतराने या बच्चों को उपदेश देने की जगह अपनी बात को रोचक और खुले तरीके से रखें। मुमकिन है कि स्कूल में बच्चों ने अपने सहपाठियों को नकल करते देखा हो और उनके मन में इससे जुड़े सवाल भी हों जिनका उत्तर बच्चा चाहता हो ।बच्चों को शिक्षा से जुडे़ अच्छी आदतें और उनमें संगठनात्मक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित करने में माता. पिता सबसे अहम् भूमिका निभा सकते है द्य उदाहरण के लिए उन्हें शिक्षा का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराएं, उन्हें समय का सदुपयोग करना व नियोजित रहना सिखाएं। समय बांट कर पढ़ना सिखाएं ताकि वे बिना ऊबे, बिना रटे ज्ञान अर्जित करें।बच्चों के सामने ऐसे लक्ष्य रखें जिन्हें वे बिना घबराएं आसानी से हासिल कर सकें। आपका प्रयास होना चाहिए कि उनका चैतरफा विकास हो ना कि उनमें स्वंय प्रतिद्वंद्विता पनपे। बच्चों को बताएं कि शैक्षणिक उपलब्धियों की ही तरह सामाजिक गतिविधियों, खेलकूद, रूचियों के विकास के अलावा अपने परिवार के साथ समय बिताना भी जरूरी है।केवल अच्छे अंक लाने के लिए प्रेरित करने के स्थान पर अपने बच्चे को शिक्षा, परीक्षा व स्कूल में दिए जा रहे ज्ञान के निहितार्थ को समझाएं। उन्हें बताएं कि इस समय ज्ञानार्जन के जरिए जिस अनुशासन को वे ग्रहण कर रहे हैं आगे चलकर सांसारिक जीवन में वह उनके लिए कितना मददगार साबित होगा।
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