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2016-05-07T14:08:22+05:30
जब गर्मी से मानव और धरती झुलस रही होती है तब धरती की तपन बुझाने और जन-मन को शीतल करने के लिए वर्षा ऋतू आती है ।

यह ऋतू जुलाई से शुरू होती है अर्थात सावन भादों के महीनों में होती है । आकाश में बदल छा जाते हैं, वे गरजते हैं और सुंदर लगते हैं । हरियाली से धरती हरी हरी मखमल सी लगने लगती है । चारों तरफ मेंढक टर्र-टर्राने लगते हैं । वृक्षों पर नये पत्ते फिर से निकलने लगते हैं । खेत फुले नहीं समाते । वृक्ष लताएँ मानो हरियाली के स्तम्भ लगते हैं ।

वर्षा ऋतू में जीव जन्तु भी बढ़ने लगते हैं । रात को टिमटिमाते जुगनू बहुत शोभा बढ़ाते हैं । पपीहे की पीहू-पीहू मन में मस्ती भर देती है । लोग वृक्षों पर झूले डालते हैं । लड़कियां झूले पर झूलती हुयी गीत गाकर समा बांध देती हैं । वर्षा से खेत फलते फूलते हैं । यदि वर्षा बहुत अधिक हो तो बाढ़ भी आ जाती है जिससे बहुत नुकसान होता है ।

जन-धन-अन्न की हानि होती है । मच्छर तथा कीड़े बहुत तंग करते हैं । वर्षा त्योहार की ऋतू भी है । इसमें रक्षा-बंधन, तीज आदि कई त्योहार आते हैं । वृंदावन तो सावन में स्वर्ग लगता है । भगवन श्रीकृष्ण का जनमोत्स्व ‘जन्माष्टमी’ पर्व भी इस ऋतू का गौरव बढ़ाती है । वर्षा ऋतू भारत भूमि को भगवान का वरदान है ।
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