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2015-02-16T19:07:52+05:30
पृथ्वी सौर मंडल के आठ ग्रहों में सूर्य की ओर से बुध और शुक्र के बाद तीसरा ग्रह है। यह सौर मंडल में व्यास, द्रव्यमान और घनत्व की दृष्टि से सबसे बड़ापार्थिव ग्रह है। इसका पृथ्वी, पृथ्वी ग्रह, , संसार और टेरा[5] के रूप में भी उल्लेख होता है।रेडियोमीत्रिक समयांकन की विधि द्वारा खोजे गये वैज्ञानिक प्रमाण संकेत देतें है कि पृथ्वी की आयु ४.५४ अरब वर्ष  पहले,पृथ्वी न केवल मानव  का अपितु अन्य लाखों प्रजातियों  का भी घर है और साथ ही ब्रह्मांड में एकमात्र वह स्थान है जहाँ जीवन  का अस्तित्व पाया जाता है। इसकी सतह पर जीवन का प्रस्फुटन लगभग एक अरब वर्ष पहले प्रकट हुआ। पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिये आदर्श दशाएँ (जैसे सूर्य से सटीक दूरी इत्यादि) न केवल पहले से उपलब्ध थी बल्कि जीवन की उत्पत्ति के बाद से विकास क्रम में जीवधारियों ने इस ग्रह के वायुमंडल  और अन्य अजैवकीय परिस्थितियों को भी बदला है और इसके पर्यावरण को वर्तमान रूप दिया है। पृथ्वी के वायुमंडल में आक्सीजन की वर्तमान प्रचुरता वस्तुतः जीवन की उत्पत्ति का कारण नहीं बल्कि परिणाम भी है। जीवधारी और वायुमंडल दोनों अन्योन्याश्रय के संबंध द्वारा विकसित हुए हैं। पृथ्वी पर श्वशनजीवी जीवों  के प्रसारण के साथ ओजोन परत  का निर्माण हुआ जो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के साथ हानिकारक विकिरण को रोकने वाली दूसरी परत बनती है और इस प्रकार पृथ्वी पर जीवन की अनुमति देता है।[11]पृथ्वी का भूपटल  कई कठोर खंडों या विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है जो भूगर्भिक इतिहास  के दौरान एक स्थान से दूसरे स्थान को विस्थापित हुए हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से धरातल का करीब ७१% नमकीन जल (salt-water) के सागर से आच्छादित है, शेष में महाद्वीप औरद्वीप; तथा मीठे पानी की झीलें इत्यादि अवस्थित हैं। पानी सभी ज्ञात जीवन के लिए आवश्यक है जिसका अन्य किसी ब्रह्मांडीय पिण्ड के सतह पर अस्तित्व ज्ञात नही है।
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