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2015-03-09T18:46:26+05:30

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"बॉल दिवस" ....:) 14नवेंबर का दिन भारत में “ बॉल दिवस “ के रूप में मनाया जाता है, क्यूंकी इस दिन बच्चों के प्रिय चाचा पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था. नेहरू जी बच्चों से बहुत प्यार करते थे . उनका विश्वास था कि बच्चों पर ही देश का भविष्य निर्भर करता है . जो आज बच्चे हैं , कल वे ही देश के नेता होंगे . बच्चों की कोमल निर्मल मुस्कान में ही देश का उजला भविष्य नज़र आता है. बच्चों के कार्यकर्म को देखते हुए वो भाव विभोर हो जाते थे. उनका कहना था की “ बालकों की आत्मा पवित्र होती है " .....देश के प्रत्येक छ्होटे बड़े नगर में बॉल दिवस मनाया जाता है. इस दिन स्कूल के छात्र एक स्थान पर इकट्ठे होते हैं. वहाँ पर अनेक प्रकार के खेलों के मुक़ाबले रखे जाते हैं बच्चे शारीरिक व्यायाम का प्रदर्शन भी करते हैं. गीत संगीत नृत्य और नाटक का कार्यक्रम भी रखा जाता है. चित्रकला की प्रायोगिता भी होती है. रंग बिरंगे वस्त्रों में सजे हंसते खेलते बच्चे उत्सव की शोभा को बढ़ाते हैं. बच्चों में पुरूस्कार और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं. पंडित नेहरू जब जीवित थे तो स्वयं इस उत्सव में शामिल होते थे और बच्चों के साथ हंसते खेलते थे !
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Plzz mrk it best dear friend :)
thanks!!
Welcome dear :)
even i wanted
2015-03-10T20:32:13+05:30
 14 नवंबर को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन होता है। इसे बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था और बच्चे उन्हें चाचा नेहरू पुकारते थे।

बाल दिवस बच्चों को समर्पित भारत का राष्ट्रीय त्योहार है। देश की आजादी में भी नेहरू का बड़ा योगदान था।

प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश का उचित मार्गदर्शन किया था। बाल दिवस बच्चों के लिए महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन स्कूली बच्चे बहुत खुश दिखाई देते हैं। वे सज-धज कर विद्यालय जाते हैं। विद्यालयों में बच्चे विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

वे अपने चाचा नेहरू को प्रेम से स्मरण करते हैं। बाल मेले में बच्चे अपनी बनाई हुई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाते हैं। इसमें बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। नृत्य, गान, नाटक आदि प्रस्तुत किए जाते हैं। नुक्कड़ नाटकों के द्वारा आम लोगों को शिक्षा का महत्व बताया जाता है।

 बच्चे देश का भविष्य हैं। इसलिए हमें सभी बच्चों की शिक्षा की तरफ ध्यान देना चाहिए। बच्चों के रहन-सहन के स्तर ऊंचा उठाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इन्हें स्वस्थ, निर्भीक और योग्य नागरिक बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। यह बाल दिवस का संदेश है।

बाल दिवस के अवसर पर केंद्र तथा राज्य सरकार बच्चों के भविष्य के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा करती है।

बाल श्रम रोधी कानूनों को सही मायनों में पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए। अनेक कानून बने होने के बावजूद बाल श्रमिकों की संख्‍या में वर्ष दर वर्ष वृद्धि होती जा रही है। इन बच्चों का सही स्थान कल-कारखानों में नहीं बल्कि स्कूल है।
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