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2015-06-08T14:12:46+05:30

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जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है
जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है
तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है
जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है
जो रवि के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा
नहीं मरेगा
जो जीवन की आग जला कर आग बना है
फौलादी पंजे फैलाए नाग बना है
जिसने शोषण को तोड़ा शासन मोड़ा है
जो युग के रथ का घोड़ा है
वह जन मारे नहीं मरेगा
नहीं मरेगा
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मेरी मिट्टी पुकारती मुझको,
लौट आओ मेरे आँचल में ;

तेरी आंखे सूनी सूनी हैं,
आजा भर दूं इनको काजल से,

मेरी गलियां पुकारती मुझको
लौट आ तू मेरी राहों में ;

उड़ती धुल मुझसे कहती है,
सिमट जा आज मेरी बाहों में!

ये खड़े पेड़ मुझसे कहते हैं,
मुझे तुझ से बात करनी है;

ज़रा पास से गुजर जा तू,
मैं जड़ हूँ तू मेरी टहनी है;

हवाओं ने कहा चुपके से,
ये रात सहमी सहमी है;

तेरा इंतज़ार है मुझको,
मुझे तुझ से बात करनी है! - See more at: http://www.poemocean.com/poem/culture-poems/meri-mitti-1927.html#sthash.w
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its poets name and poem name
poem name- meri mitti and poet name - abhishek shukla