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2015-06-10T13:30:44+05:30
चाँदछोड़ो अब वो बात पुरानी,
सूत कातती बुढ़िया की कहानी.

आओ सच्ची बात बतायें,
चाँद है कैसा, तुम्हे बतायें.

पर्वत ऊँचे, गड्ढे गहरे,
भांति-भांति के पत्थर बहुतेरे.

ऑक्सीजन का नाम नहीं है,
भार का कोई काम नहीं है.

चाँदनी जो हमें पहुँचाता,
रोशनी वो सूरज से पाता.

ऐसा वक़्त वो आयेगा,
सपने सच कर जायेगा.

चाँद पर एक बस्ती बसायेंगे,
मामा के घर तब जायेंगे.
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