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2015-06-26T15:18:25+05:30

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आजादी के ६२ सालों में भारत ने तमाम क्षेत्र में जबरदस्त तरक्की की है और विस्व के मानचित्र पर अपनी छवि बेहतर बनायीं है. इसके भावजूद भी आधुनिक भारत में भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोज़गारी और महंगाई की समस्याएं है. भ्रष्टाचार हमारे सिस्टम के गहराई तक घुस गया है. कहीं भी कोई भी काम ईमानदारी से हो जाती तो हैरानी होता है. एक तो लालफीताशाही और उस पर लेटलतीफी. लोगों का भी हाल ऐसा लगता है कि जो है, जैसा है की स्थिति को उन्होने स्वीकार कर लिया है. लोग वोट डालने तक की जहमत नहीं उठाते. सिस्टम से उनका विश्वास हिला है, तो वे खुद को सिस्टम से अलग कर चलने की कोशिश करने लगते हैं. आज़ादी के बाद हमारी आबादी तीन गुना बाद चूका है.इस विस्फोट हमारे विकास के प्रतिकूल प्रभावित है.आज यहाँ पर लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है. जैसे रहने के लिए घर नहीं है, पीने के लिए साफ़ पानी नहीं है, खाद्य पदार्थ की गुणवक्ता पर विश्वास नहीं किया जा सकता, बिजली आती कम है और जाती ज़्यादा है. लोग कठिन परिस्थितियों में रहते हैं जो मानव क्षमता के विकास के लिए अनुकूल नहीं हैं. गरीब बच्चों की एक बड़ी खंड स्कूल नहीं जाते. बेरोज़गारी बड़ी तरह से विद्यमान है भारत में. व्यक्तियों को उनकी क्षमता व योग्यता के अनुसार कार्य नहीं मिलता तो वो बेकार बैठते है. जनसँख्या वृद्धि ने बेरोज़गारी समस्या को विराट रूप दे डाला है. यह सब समस्या भारत को अंदर ही अंदर खाए जा रहे हैं. इन समस्याओं से शीग्र ही निजात पाना होगा.वार्ना हमारी विकास नहीं होगा.
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