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2015-10-08T00:58:51+05:30

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     "मेक इन इंडिया" है भारत के सरकार का एक नीति, योजना और करवाही है। बड़े बड़े विदेशी निवेशकों  और औध्योगिकों  को भारत के अंदर अपने उत्पाद विनिर्माण करने के लिए उत्सुक करने का यह अर्थ व्यवस्था में एक बड़ा सुधार है ।  25, सितंबर 2014 को प्रधान मंत्री मोडीजी ने इसे आरंभ किया था। अब तक एक साल हो गया।

     हम देखते हैं कि विदेशी और कुछ भारतीय औध्योगिक अपने उत्पाद बनाने के कारखाने भारत के बाहर लगा रहे हैं।  भारत के अंदर कार्यालय स्थापित करने के लिए वे काफी उत्साह नहीं दिखा रहे हैं।  इस के लिए कुछ कारण बताए गए कि यहाँ पर अधिकार पत्र या अनुज्ञापत्र पाने के बाद देर लगता है।  भारत के अंदर के शासन, कानून, कर निर्धारन व्यवस्था बहुत कठिन है। आधारिक  संरचना, अवगम प्रौध्योगिकी , परिवहन व्यवस्था और कुछ कारण भी बताए जाते हैं।

      इस सुधार का मुख्य उद्देश्य है आविष्कार और नवीनता को प्रोत्साहन देना, किसी संस्था के इंटेलेक्चुवल प्रॉपर्टी अधिकारों का रक्षा करना, अनुज्ञापत्र पाने में और पुनःस्थापित करने के क्रियाविधि  में सरलता लाना और दुनिया के ऊंचे स्तर  के  बराबर के आधारिक संरचना का प्रबंध करना । आवेदन  पत्रों का जांच और जारी करने में पारदर्शिता भी इन में शामिल है।

 
      देश के अंदर एफ़. डी. आई (FDI) की स्थिति में बदलाव लाने के लिए मोडीजी ने मेक इन इंडिया शुरू किया।  सरकार ने अपने अनुज्ञप्ति नीति में सुधार लाया। उसे सरल किया।  एक नया ऑनलाइन इंटरनेट वेब सैट का आयोजन  किया।  इस में सारे विषयों का जानकारी दिया हुआ है, जिनके जानना औढयोगिककर को आवश्यक है।  अब आवेदन पत्र जल्द से जल्द पास होंगी।

 
      पिछले साल किए हुए वचन पूरा करने के लिए हजारों करोडों रुपये खर्च भी किए गए । भारत सरकार चाहता है कि बहुल आवश्यक वस्तु (खाने के, एलेक्ट्रोनिक या केमिकल, पारिश्रमिक या लोहा संबंधी वगैरा) भारत में बनें और उनके ऊपर अंकित चिप्पी या अंकित पट्टी पर “मेड इन इंडिया” लिखा जय। इससे तीन  फाईदे हैं।  भारत के नौजवानोंकों काम मिलेगा। निवेश बढ़ेगा। आर्थिक व्यवस्था और वस्तु बाजार में स्थिरता होगी। अब जो कोरिया के मोबाइल या अन्य वस्तु खरीदते हैं, उनके लिए दिया जा रहा कर (विदेशी मुद्रा) बचेगा। और जब वस्तु भारत के अंदर बनेगा, उससे उत्पाद शुल्क मिलेगा ।  इस से भारत का नाम और भारतीय वस्तुओं का प्रतिष्ठा बढ़ेगा।

 
   सरकार ने औध्योगिकों  के चालू होने के बाद होनेवाले सालीन लेखापरीक्षा कार्यविधि में भी कुछ सरलता लाया।  पर्यावरण संबंधी मामले के ऊपर कुछ किया गया।  देश के बहुत राज्यों को जो जो जरूरी प्रमाणीकरण करना हो , उन्हें जल्दी करने या पाने के आदेश दिये गए।  एक नया राष्ट्रिय औध्योगिकी विकास अधिकारी संस्था का स्थापन किया गया। देश को औध्योगिकी विकास मंडलों में भाजित किया गया। और उन मंडलों में विकास का काम शुरू किया गया।  नए कारखानों में काम करने के लिए कर्मचारियों की जरूरत होती है।  जो जो कलाओं में निपुणता चाहिए होता है, उनके लिए प्रशिक्षण का भी आयोजन किया जाएगा  विध्यमान प्रशिक्षण केन्द्रोंमें और विश्वविद्यालयों में ।

     इन सब के साथ साथ “डिजिटल इंडिया”, स्वच्छ भारत” और अन्य विकास योजनाएँ जारी हैं, उनसे मेक इन इंडिया का सफलता हासिल होगा।  अब तो हमें कुछ साल इंतजार करना है, “मेड ईन इंडिया” का नाम पट्टी प्रतिष्ठात्मक बनें और भारतीय भी अपने एक उत्पादकता केंद्र बनें और  विकासित देश में बदल जाये  ।

  
   हम खुश हो सकते हैं यह जानके कि “फोक्सकोन्न (Foxconn)“ संस्था भारत में “आपेल (Apple) के आईफोन (iPhone) बनानेके कारोबार का स्थापना करेगा।  गाड़ियों के संस्थाएं “मेर्किडेस बेंज़”, बी. एम. डब्ल्यू. , वॉल्वो, रेनोल्ट (Renault)  “मेक इन इंडिया” का फाइदा उठाने के लिए आगे बढ़े हैं ।  हुंडाइ भारी औढयोगिक संस्था , सामसंग, सान ग्रूप , रिलायंस संस्था, रफाल और एयर बस (दोनों फ्रांस के) भी शामिल हो गए हैं।   भारतीया रेल भी हजारों  करोडों  के व्यापार जैसे कि नए गाड़ी के डिब्बे बनानेका कारोबार का स्थापना करने में काफी आगे बढ़ चुका है।
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