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2014-06-25T01:35:54+05:30
कुच साहित्यों कारों ने अर्थ के विचार से अलंकारों के कई वर्ग भी बनायें हैं।(फिगर आँफ स्पीच) विशेष यह तीन प्रकार का माना गया है शब्दालंकार, अर्थालंकार और उभयालंकार।साहित्य में, शब्दों और उनके अर्थों में अनियमित रूप से रहनेवाला वह तत्त्व या धर्म जिसके कारण किसी व्यंग्यार्थ की प्रतीति के बिना भी, शब्दों की अनोखी विन्यास शैली से ही, किसी कथन के व्यंग्यार्थ में कुच विशेष चमत्कार, रमणीयता या शोभा आ जाती है| hope i helped u:)
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