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2015-12-17T05:30:11+05:30

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रोहित बात का धनी था। सारे बच्चे उसकी बातों से प्रसन्न रहते थे। परन्तु ऐसे आस्तीनों के साँप की कमी नहीं होती, जो होते तो मित्र हैं परन्तु कार्य शत्रुओं वाला करते हैं। उसके ऐसे ही एक परम नाम के मित्र ने उसकी आँख में धूल मिलाने की सोची। परम ने एक लड़के (राम) की किताब चोरी कर ली और उसका इलज़ाम रोहित पर लगा दिया। जब राम अपनी किताब रोहित से माँगने आया तो, रोहित हैरान हो गया। राम उसे आँखें दिखा रहा था परन्तु उसने किसी की किताबें नहीं चोरी थी। । रोहित ने राम से  कहा - "मित्र मैं तुम्हारी किताब तब चोरी करता जब मैं शहर में होता। मैं तो आज ही अपने नाना के यहाँ से आया हूँ। तुम्हारी किताब कल चोरी हुई है। यदि यकीन न हो तो कहीं से भी पता कर सकते हो।" रोहित के अन्य मित्रों ने उसकी हाँ में हाँ मिलायी।  उसने राम से पूछा :"तुम्हें यह बात जिसने बताई है हो न हो उसी ने तुम्हारी किताब चोरी की है। वह मुझे जानबूझकर इसमें फंसा रहा है।" राम को बात समझ में आ गई। रोहित ने अपनी समझदारी से विरोधियों को अँगूठा दिखा दिया था। कोई उसका बाल-बांका भी नहीं कर सका। 
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