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2015-12-21T17:44:49+05:30
अग्निशेषमृणशेषं शत्रुशेषं तथैव च |
पुन: पुन: प्रवर्धेत तस्माच्शेषं न कारयेत् ||
If a fire, a loan, or an enemy continues to exist even to a small extent, it will grow again and again; so do not let any one of it continue to exist even to a small extent.यदि कोई आग, ऋण, या शत्रु अल्प मात्रा अथवा न्यूनतम सीमा तक भी अस्तित्व में बचा रहेगा तो बार बार बढ़ेगा ; अत: इन्हें थोड़ा सा भी बचा नही रहने देना चाहिए । इन तीनों को सम्पूर्ण रूप से समाप्त ही कर डालना चाहिए ।

पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् |
मूढै: पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा प्रदीयते ||
There are three jewels on earth: water, food, and adages. Fools, however, regard pieces of rocks as jewels.पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं जल अन्न और अच्छे वचन । फिर भी मूर्ख पत्थर के टुकड़ों को रत्न कहते हैं ।
नाभिषेको न संस्कार: सिंहस्य क्रियते मृगैः |
विक्रमार्जितराज्यस्य स्वयमेव मृगेंद्रता ||
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