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2016-01-07T07:39:27+05:30

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  स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था । उनके पिता  का नाम विश्वनाथ दत्ताऔर  माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था ।कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपनी शिक्षा के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों में ज्ञान प्राप्त किया - विशेष रूप से पश्चिमी दर्शन और इतिहास में ।उनके गुरु ने उन्हें सिखाया था कि सभी जीवित प्राणियों परमात्मा स्वयं का एक अवतार है इसलिए, परमेश्वर की सेवा मानव जाति के लिए सेवा द्वारा ही की जा सकती है। स्वामी विवेकानंद अपने आध्यात्मिक प्रतिभा और पश्चिमी दुनिया को  भारतीय वेदांत का दर्शन और योग से परिचित करवाने के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने जनता को शिक्षित करने के  लिये, महिलाओं का उत्थान और गरीबों के विकास के लिये  रामकृष्ण मिशन नाम के संगठन की नींव रखी।  

1893 में शिकागो विश्व धर्म परिषद में भारत के प्रतीनिधी बनकर गये। हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व में उनके भाषण ने उन्हें  अमेरिका में प्रसिद्धि दिला दी  और उनके आध्यात्मिक शिक्षण के लिए एक तैयार मंच दिया। अपने व्यख्यान से स्वामी जी ने सिद्ध कर दिया कि हिन्दु धर्म भी श्रेष्ठ है, उसमें सभी धर्मों समाहित करने की क्षमता है। वे पश्चिम के लिए भारत के  पहले महान सांस्कृतिक राजदूत थे। भारत में हिंदू धर्म के पुनरुद्धार में उनकी  विशेष मुख्य भूमिका है।
उन्होंने वेदांत और योग से पश्चिम के देशों को परिचित करवाया। उन्हें अपने भाषण के लिए 'ऑरटर बाये डिवाइन लाइट' और 'पश्चिमी दुनिया के लिए भारतीय ज्ञान  दूतगया।  संसद के बाद, लगभग साढ़े तीन साल तक  स्वामीजी अमेरिका के पूर्वी भागों में और भी लंदन में रहे और श्री रामकृष्ण द्वारा सिखाये वेदांत का प्रसार किया।    

उन्होंने पश्चिम के लोगों के लिए  हिन्दू संस्कृति का अनुवाद  किया ताकि वे लोग भी हिन्दू धर्म को समझ सकें और उस की अच्छी बातों  को अपना सकें। स्वामीजी ने पश्चिमी देशों में भारत के महान आध्यात्मिक विरासत का प्रचार किया। जून 1895 में, विवेकानंद ने  दो महीने तक न्यूयॉर्क 'थाउजेंड आइलैंड पार्क' में दर्जन से अधिक निजी लेक्टर दिए।  अमेरिका की अपनी यात्राओं के दौरान, विवेकानंद सैन फ्रांसिस्को और न्यूयॉर्क में वेदांत सोसायटी की स्थापना की और कैलिफोर्निया में एक शांति आश्रम (शांति पीछे हटने) की स्थापना की। उन्होंने भारतीय संस्कृति और विचारधारा का अनुवाद पश्चिम लोगों के लिए बड़ी ही सहजता से किया और आपसी समझ को बढ़ावा दे कर  पूर्व और पश्चिम के बीच एक पुल के निर्माण किया।
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