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2016-02-02T17:12:53+05:30
धरा पे छाई है हरियाली खिल गई हर इक डाली डाली नव पल्लव नव कोपल फुटती मानो कुदरत भी है हँस दी छाई हरियाली उपवन मे और छाई मस्ती भी पवन मे उडते पक्षी नीलगगन मे नई उमन्ग छाई हर मन मे लाल गुलाबी पीले फूल खिले शीतल नदिया के कूल हँस दी है नन्ही सी कलियाँ भर गई है बच्चो से गलियाँ देखो नभ मे उडते पतन्ग भरते नीलगगन मे रन्ग देखो यह बसन्त मसतानी आ गई है ऋतुओ की रानी published in "Dakshin Bharat".. Hope I helped u.. Plz mark as the BRAINLIEST answer..
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