माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ सेंकने के लिए है
जलने के लिए नहीं
वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं स्त्री जीवन के
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।

(क) माँ बिटिया को किस अवसर पर यह सीख दे रही है और क्यों?
(ख) बिटिया को चेहरे पर रीझने के लिए मना क्यों किया जा रहा है?
(ग) आग के विषय में माँ के कथन का क्या अभिप्राय है?
(घ) माँ ने आभूषणों को स्त्री जीवन के बंधन क्यों कहा है?
(ङ) ‘लड़की जैसी दिखाई मत देना’ कथन का आशय समझाइए।

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Answers

2016-02-09T21:14:21+05:30
माँ बेटी को शादी के समय कह रही है. ख. अपनी खुूबसुरती के ऊपर घंमड मत करना
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