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2016-03-08T15:50:10+05:30
हर दौर अपने साथ एक चलन ले कर चलता है जिसे फैशन कहते हैं लेकिन न तो फैशन को आधुनिकता का पर्याय माना जा सकता है और न ही इसकी अंधी लहर में बहना उचित होता है। 

विशेषज्ञों की राय में फैशन समय की माँग नहीं होता लेकिन युवाओं की राय इससे विपरीत है। उन्हें लगता है कि फैशन के अनुरूप अगर वह न चलें तो उन्हें उनके समकक्षों की तुलना में कमतर माना जाता है।

फैशन डिजाइनर निखिल मानते हैं कि फैशन न कोई लहर है और न ही दीवानगी है। यह केवल एक बदलाव है जो नयेपन का अहसास कराता है। वह कहते हैं कि कुछ कुछ वर्षों के अंतराल में हम वह सब अपनाते जाते हैं जिसे कभी हमने पीछे छोड़ दिया था। 

कपड़े, हेयर स्टाइल, मेकअप, कहीं भी कुछ भी पुराना नहीं होता। बदलाव के साथ साथ कुछ नए प्रयोग चलते रहते हैं। वह यह भी कहते हैं कि जो भी लोगों को भा जाए, वह चलन में आ जाता है और उसे ही फैशन नाम दे दिया जाता है। लेकिन कोई भी प्रयोग या बदलाव यह सोच कर नहीं किया जाता है कि इससे एक नए फैशन की शुरूआत होगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र में एमए कर रहे मलय चौधरी कहते हैं 'फैशन तो वही होता है जो चलन में होता है। आज अगर जींस का दौर है और मैं धोती पहनूँ तो कैसा लगेगा। धोती पहन कर कॉलेज नहीं जाया जा सकता, लेकिन किसी खास समारोह में अगर मैं धोती पहने नजर आउं तो शायद मैं ही फैशनेबल कहलाउँगा।' 
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