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2014-08-07T20:57:01+05:30

prabhu ji tum chandan hum pani || jaki ang- ang bas samani ||

prabhu ji tum ghan hum mora || jaise chitvan chand chakora ||

prabhu ji tum Deepak hum bati || jaki jyoti baire din rati ||

prabhu ji tum moti hum dhaga || jaise sonhi molat suhaga ||

prabhu ji tum swami hum dasa || aisi bhakti kare raidasa ||



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2014-08-07T21:41:14+05:30
अबिगत नाथ निरंजन देवा।
मैं का जांनूं तुम्हारी सेवा।। टेक।।

बांधू न बंधन छांऊं न छाया, 
तुमहीं सेऊं निरंजन राया।।1।।

चरन पताल सीस असमांना, 
सो ठाकुर कैसैं संपटि समांना।।2।।

सिव सनिकादिक अंत न पाया, 
खोजत ब्रह्मा जनम गवाया।।3।।

तोडूं न पाती पूजौं न देवा,
सहज समाधि करौं हरि सेवा।।4।।

नख प्रसेद जाकै सुरसुरी धारा, 
रोमावली अठारह भारा।।5।।

चारि बेद जाकै सुमृत सासा, 
भगति हेत गावै रैदासा।।6।
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