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2016-04-18T09:17:17+05:30
मेरी मिट्टी पुकारती मुझको,
लौट आओ मेरे आँचल में ;

तेरी आंखे सूनी सूनी हैं,
आजा भर दूं इनको काजल से,

मेरी गलियां पुकारती मुझको
लौट आ तू मेरी राहों में ; 

उड़ती धुल मुझसे कहती है,
सिमट जा आज मेरी बाहों में! 

ये खड़े पेड़ मुझसे कहते हैं,
मुझे तुझ से बात करनी है; 

ज़रा पास से गुजर जा तू,
मैं जड़ हूँ तू मेरी टहनी है;

हवाओं ने कहा चुपके से,
ये रात सहमी सहमी है;

तेरा इंतज़ार है मुझको,
मुझे तुझ से बात करनी है!
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