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2016-04-22T19:57:12+05:30
नेपाल भूकंप त्रासदी- 2015
'भूकंप' का अर्थ है पृथ्वी के वे कंपन जो धरातल को कंपा देते हैं और इसे आगे पीछे हिलाते हैं। भूगर्भिक हलचलों के कारण भूपटल तथा उसकी शैलों में संपीडन एवं तनाव होने से शैलों में उथल-पुथल होती है जिससे भूकंप उत्पन्न होते हैं। भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। 

वर्ष 2015 नेपाल के लिए तबाही का साल रहा है। 25 अप्रैल 2015 को आये भूकंप का मंजर दिल दहला देने वाला था। इन दिनों प्राकृतिक आपदाओं ने पूरे नेपाल को तहस-नहस करके रख डाला। 25 अप्रैल के पश्चात आये भूकंप के अनेक झटकों ने वहां के जन-जीवन और आर्थिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया। हजारों लोग मारे गए, कई बच्चे अनाथ हो गए और हजारों लोग बेघर हो गए।

2015 में नेपाल में आये भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.9 थी जो 25 अप्रैल 2015 को सुबह 11:56 स्थानीय समय में घटित हुआ। भूकंप का अधिकेन्द्र लामजुंग, नेपाल से 38 कि॰मी॰ दूर था। 1934 के बाद पहली बार नेपाल में इतना प्रचंड तीव्रता वाला भूकंप आया है जिससे 10000 से अधिक मौते हुई हैं और 7000 से अधिक घायल हुए हैं। भूकंप में कई महत्वपूर्ण प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर व अन्य इमारतें भी नष्ट हुईं हैं। भूकंप के झटके चीन, भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी महसूस किये गये।

भूकंप के तुरंत बाद भारत नेपाल के ऑपरेशन मैत्री ने रफ्तार पकड़ ली भूकंप के तुरंत बाद राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ़ की 10 टीम नेपाल भेजी गयी तथा 6 और टीमे भेजने की घोषणा की गयी। 13 मिलिट्री एयर क्राफ्ट, 50 टन पानी और अन्य सामग्री भेजी गयी। एक मानव रहित एरियल भी भेजा गया ताकि नुकसान का जायजा लिया जा सके। आंकलन है कि उक्त नेपाल त्रासदी से लगभग 80 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।  
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