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2016-05-07T16:08:52+05:30

झलक रही सुंदरता हिंद की, बिना किये सृंगार
खूबसूरत है वादी इसकी-2, करते हम झरनो से प्यार

लेकर निकल पड़े घर से, स्वच्छ भारत का अभियान
हिंदुस्तान को स्वच्छ बनाकर-2, तब ही लौटेंगे हम यार
अपनी आन है अपनी शान है-2
सिर का है ये ताज हमारा, और यही संसार
झलक रही सुंदरता हिंद की, बिना किये सृंगार

देखा करते थे सपना, साबरमती के संत
गाँव शहर और मुहल्ला-2, स्वच्छ होगा हर पंत
आओ सभी अब साथ चले-2
एक अकेला थक जायेगा, मिलके काम करो मेरे यार
झलक रही सुंदरता हिंद की, बिना किये सृंगार

झरनो से निकली नदिया, कल कल नदिया निकली
हमने ऐसा प्यार दिखाया-2, होती गयी ये मैली
कैसा प्यार ये कैसा प्यार है-2
जिसको चाहा था हमने, उसको दिया है कर बेकार
झलक रही सुंदरता हिंद की, बिना किये सृंगार


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2016-05-07T16:09:29+05:30
लेखिका: रत्ना (Ratna) झलक रही सुंदरता हिंद की, बिना किये सृंगार खूबसूरत है वादी इसकी-2, करते हम झरनो से प्यार लेकर निकल पड़े घर से, स्वच्छ भारत का अभियान हिंदुस्तान को स्वच्छ बनाकर-2, तब ही लौटेंगे
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