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2014-10-08T21:35:46+05:30
प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंशबिगड़ते पर्यावरण का प्रमुख कारण द्रुतगति ये बढ़ती जनसंख्या है, जिसकी प्राथमिक आवश्यक्ताओं की पूर्ती नहीं हो पा रही है। इसके लिए आधुनिक विज्ञान की तकनीक का अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें पर्यावरण प्रदूषण हो रहा है। मानव युद्ध शुद्ध पर्यावरण के लिए हमें इकोनामी एवं इकोलाजी को संतुलित करना होगा। इन कठिन समस्याओं के बारे में हिन्दी में पर्याप्त साहित्य उपलब्ध नहीं है। परिणाम स्वरूप हमें सही ढंग से सोचने व जन समुदाय को प्रशिक्षण करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

जनसंख्या प्रदूषण और पर्यावरण पुस्तक में लेखक ने कड़ी मेहनत कर गम्भीर समस्याओं के कारणों और निदान को सरल ढंग से प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया है। उन्होंने मानव मूल्यों का पर्यावरण के सापेक्ष में सुन्दर ढंग से आकलन किया है। नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के जीवन का विभिन्न पहलुओं में पर्यावरण से क्या सम्बन्ध रहा है , इसको अनुपम एव सरल ढंग से इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। इस औद्योगिक युग में प्रकृति को नष्ट करके मानव अधिकतम सुख सुविधाएँ प्राप्त कर रहा है, जो उसके अस्तित्व के लिए चिन्ता का कारण हो सकती है।

यह पुस्तक न केवल परिस्थिति की विज्ञान व पर्यावरण को सैद्धान्तिक रूप से समझने में सहायक होगी बल्कि पर्यावरण के संरक्षण एवं इष्टम उपयोग (Optinization) से भी पाठकों को अवगत कराएगी
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