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2014-11-27T17:03:34+05:30
हम  सब  एक सेक्युलर ( पंथनिरपेक्ष  ) देश  में  रहते  हैं | सेक्युलरिज्म   एक  सबसे  उम्दा  मानवीय  विचार  है |जिसमें  कोई  भी  नीतिगत  व्यवस्था  ,प्रक्रिया (नीतिगत )या  मानसिकता  किसी  भी  फिरके  (पंथ ) या  साम्प्रदायिक अवधारणाओं  –   से  प्रभावित  नहीं  होती | सेक्युलरिज्म  की  पूरी  अवधारणा  -साम्प्रदायिक  सौहार्द  की  अवधारणाओं   पर  खड़ी  है |मोहनदास  करमचंद   गाँधी  साम्प्रदायिक  सौहार्द   के  बड़े   पक्षधर  थे |उन्होंने ‘ ईश्वर  अल्लाह  तेरो  नाम ‘ भजन  को  प्रचलित  किया | मतलब  ईश्वर  और  अल्लाह  एक  ही  हैं | उनके  ज़माने  के  साम्प्रदायिक  सदभाव वाले   और  सेक्युलर  लोग  यह  सुरीला  गीत  सभी  मंदिरों  में  गाते  थे | और  यह   आज  भी   गाया  जाता  है | हम  यह  गाना  स्कूलों एवं सामूहिक  जमावडों  में  गाते  गाते  बड़े  हुए   हैं |विश्व  हिन्दू  परिषद् , राष्ट्रीय  स्वयं  सेवक  संघ   और  आर्यसमाज  को  प्रायः  फिरकापरस्त  और   दक्षिणपंथी  कहा  जाता  है | उन  पर  आरोप  लगाया  जाता  है  कि  वे  साम्प्रदायिक  सदभाव  नष्ट  करने  पर  तुले  हुए  हैं | हाल   में  ही  जिस  प्रकार  यह  फिरकापरस्त  ताकतें  पनप  रही  हैं  और  उपमहाद्वीप  की  शांति  और  सौहार्द  को  आहात  कर  रही  हैं , उससे  देश  और  दुनिया  का  बौद्धिक  वर्ग  चिंतित  है | जब  कभी  भी  कहीं  आतंकी  हमला  होता  है  तब  ये  फिरकापरस्त  ताकतें  उसे  मुस्लिम  आतंकवाद  करार  देती  हैं| और पंथनिरपेक्ष मीडिया  को  अपनी   पूरी  ताकत  और  प्रयत्न  यह  जताने  में  खर्च  करने  पड़ते  हैं  कि  आतंक  का  कोई   धर्म  नहीं  होता | उन्हें  अच्छे  मुसलमानों   और  बुरे  हिन्दुओं की  वीडियो  और  फिल्मों  के साथ  पेश  होना पड़ता  है  ताकि  मुस्लिमों  के  प्रति  गलत  अवधारणाओं के  सामने  संतुलन  किया  जा   सके  | मालेगांव   जैसी   जगहों  पर  जहाँ  गौवध  प्रचुरता  से  चलन  में  है ,वहां  के  छोटे -मोटे  बम  धमाकों  को  बढ़ा -चढ़ा  कर  प्रसारित  करना  पड़ता  है | फिर  राज्य  की  सारी  व्यवस्थाएँ  इन तथाकथित  दक्षिणपंथी  ताकतों  को  पकड़ने  के  लिए  हरकत  में  आती  हैं |यह  अलग  बात  है  की  कुछ  बड़े  आतंकी  हमले शायद  इतने  बड़े  नहीं  होते  ताकि  उनके धमाके से  राजकीय  व्यवस्था जागृत  हो सकें | इसीलिए  हम  वर्षों  से  अफ़ज़ल   की  सजा  का  इंतजार  कर  रहे  हैं | क्योंकि  एक  साधारण  अवधारणा  बनी  रही  है  कि  इस  देश  का  बौद्धिक  वर्ग  यह  मान  चुका  है  कि  हिन्दू  बहुत  ही  फिरकापरस्त  बन  चुके  हैं | हिन्दू  अंतर्राष्ट्रीय  स्तर  पर  होने  वाले  तमाम  आतंकवाद  के  लिए  मुसलमानों  और  खास  तौर  पर   मुल्ला -मौलवियों  को  दोषी  ठहराने  पर तुला  हुआ  हैं | यह  तो  सिर्फ  संयोग  और  पाश्चात्य  मीडिया  का  षडयंत्र  ही  है  कि  अधिकतर  आतंकी  और  सोमालियाई  समुद्री  डाकुओं  का  जो  गिरोह  प्रकाश  में  आया  है -वे  भी मुस्लिम  ही  निकले  हैं | पर  वास्तविकता  फिर भी यही  है  कि  हिन्दू  आतंकवाद  कहीं  ज्यादा  खतरनाक  है  और  इसलिए   उसको  रोकना  प्राथमिकता  होनी  चाहिए !अगले  लेखों  में  हम  हिन्दू  और  इस्लामिक  आतंकवाद  और  उनके  कारणों  का  मूल्यांकन जरूर  करेंगे| पर  अभी  हम  एक  व्यवहारिक  समाधान  सूचित  कर  रहे   हैं | जिससे  सभी हिन्दू  और  मुस्लिम  साम्प्रदायिक  सौहार्द  को  बढ़ावा  दें और  सेक्युलरिज्म  को  प्रोत्साहित  करें |इस समाधान  के  लिए  मैं   मोहनदास  करमचंद  गाँधी  से  प्रेरित  हूँ | जो  इस  समाधान  को  स्वीकार  कर  लेते  हैं , वह  सच्चे  सेक्युलर   हैं  और  इससे  इंकार  करने  वाले  असली  फिरकापरस्त  हैं |क्योंकि   जो  मैं  दे रहा हूँ, वह  केवल   गांधीजी  के ‘ ईश्वर  अल्लाह  तेरो  नाम’  का  ही  विस्तार  है|
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