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The Brainliest Answer!
2014-12-28T12:22:10+05:30
भारत में बलोको को आबादी बोहोत ज्यादा हे और साथ में गरिबोकी भी ज्यादा हे हम सब
जानते हे की बचपन इन्सान के जीवन का सबसे हसीं पल होता हे , जहा न किसी बात की चिंता , न कोई समस्या और न कोई जिम्मेदारी . बस हर समय साथियों के साथ खेलना कूदना मस्ती करना , इसे ही बचपन कहते हे लेकिन ये सिर्फ अच्छे घरो के बच्चो के लिए हे गरीबो के बच्चो के किस्मत में कम के आलावा कुछ नहीं होता .
आज दुनिया में  जिनकी उम्र 14 वर्ष से कम है। और इन बच्चों का समय स्कूल में कॉपी-किताबों और दोस्तों के बीच नहीं बल्कि होटलों, घरों, उद्योगों में बर्तनों, झाड़ू-पोंछे और औजारों के बीच बीतता है।
जबकि सर्कार ने नियम बनाया हे की 14 वर्ष से कम की उम्र के बचो को कम करवाना कानून के खिलाफ हे
 
बड़ी-बड़ी बातें, बड़े-बड़े नारे लगाने के बाद भी बाल श्रमिकों की हालत आज भी वैसी ही है जैसे पहले थी. भारत समेत लगभग सभी विकासशील देश और यहां तक की विकसित देशों में भी आपको बाल श्रम देखने को मिलेगा. चाय वाले की दुकान हो या कोई होटल और तो और भारत में तो बाल श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा चूड़ी बनाने, पटाखा बनाने और अन्य खतरनाक कामों में भी लिप्त है. इन बच्चों को चंद पैसा देकर इनके मालिक इनसे जरूरत से ज्यादा काम कराते हैं. कम पैसे में यह बच्चे अच्छी मजदूरी देते हैं और ज्यादा आवाज भी नहीं उठाते, यही वजह है कि ऐसे कारखानों के मालिक बच्चों को शोषित करने का कोई भी मौका नहीं गंवाते.
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let me sent u frnd request
Thanks
ohh dear
accept request
U r in which school soumya????????