Answers

  • Brainly User
2015-04-01T11:47:55+05:30

This Is a Certified Answer

×
Certified answers contain reliable, trustworthy information vouched for by a hand-picked team of experts. Brainly has millions of high quality answers, all of them carefully moderated by our most trusted community members, but certified answers are the finest of the finest.
Madhur Madhur mere Deepak Jal" is a poem by Mahadevi Varma. 
Here are the stanzas... 
मधुर मधुर मेरे दीपक जल! 
युग युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल; 
प्रियतम का पथ आलोकित कर! 

सौरभ फैला विपुल धूप बन; 
मृदुल मोम-सा घुल रे मृदु तन; 
दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित, 
तेरे जीवन का अणु गल-गल! 
पुलक-पुलक मेरे दीपक जल! 

सारे शीतल कोमल नूतन, 
माँग रहे तुझको ज्वाला-कण; 
विश्वशलभ सिर धुन कहता "मैं 
हाय न जल पाया तुझमें मिल"! 
सिहर-सिहर मेरे दीपक जल! 

जलते नभ में देख असंख्यक; 
स्नेहहीन नित कितने दीपक; 
जलमय सागर का उर जलता; 
विद्युत ले घिरता है बादल! 
विहंस-विहंस मेरे दीपक जल! 
0